फूलन प्रसाद वर्मा ने 11 सितंबर 1947 को बिहार विधानसभा में बिहार के प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) श्री कृष्ण सिन्हा से सवाल किया –
प्रश्न:
फूलन प्रसाद वर्मा:
माननीय प्रधानमंत्री से निवेदन है कि कृपया बताएं:
(क) हाल की साम्प्रदायिक दंगों में बिहार में कितने व्यक्ति मारे गए;
(ख) वास्तव में कौन-कौन से क्षेत्र प्रभावित हुए; प्रांत के कितने अनुमंडल इन दंगों से प्रभावित हुए;
(ग) इन दंगों का स्थान-स्थान पर कैसे विस्तार हुआ, इसका संक्षिप्त कालक्रमिक विवरण;
(घ) कितने स्थानों पर गोली चलानी पड़ी;
(ङ) गोली चलने के कारण कितने लोग मारे गए?
जिसके जवाब में श्री कृष्ण सिन्हा सदन में कहते हैं –
उत्तर:
माननीय श्री श्रीकृष्ण सिंह (प्रधानमंत्री):
(क) इन दंगों में 5,558 व्यक्तियों के मारे जाने की रिपोर्ट है।
(ख) और (ग) इस विषय में जो जानकारी उपलब्ध है, उसका एक विवरण पटल पर रखा गया है।
(घ) और (ङ) गोली चलाने की घटनाएँ 82 स्थानों पर (कुल 89 बार) हुईं और लगभग 393 व्यक्तियों के गोली से मारे जाने की सूचना है।
दंगों से प्रभावित क्षेत्र का विवरण:
|
क्र. |
जिला |
प्रभावित गाँव और मोहल्लों की संख्या |
प्रभावित क्षेत्र |
दंगों की तिथियाँ |
|
1 |
सारण(छपरा) |
67 |
सदर अनुमंडल (छपरा नगर सहित) |
25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 1946, इसके बाद केवल कुछ छिटपुट घटनाएँ हुईं |
|
2 |
पटना |
876 |
(i) पटना सिटी अनुमंडल |
27 से 29 अक्टूबर 1946, इसके बाद कुछ ही घटनाएँ हुईं |
|
(ii) सदर अनुमंडल |
28 अक्टूबर से 3 नवम्बर 1946, फिर कुछ छिटपुट घटनाएँ |
|||
|
(iii) दानापुर अनुमंडल |
30 अक्टूबर से 4 नवम्बर 1946, फिर कुछ घटनाएँ |
|||
|
(iv) बाढ़ अनुमंडल |
28 अक्टूबर से 5 नवम्बर 1946, फिर छिटपुट घटनाएँ |
|||
|
(v) बिहार अनुमंडल |
1 नवम्बर से 6 नवम्बर 1946, फिर केवल कुछ घटनाएँ |
|||
|
3 |
गया |
22 |
(i) जहानाबाद अनुमंडल |
नवम्बर 1946 में कुछ छिटपुट घटनाएँ |
|
(ii) नवादा अनुमंडल |
3 से 5 नवम्बर 1946, फिर कुछ ही घटनाएँ |
|||
|
(iii) बोधगया अनुमंडल |
6 और 7 नवम्बर 1946, इसके बाद कुछ ही घटनाएँ |
|||
|
4 |
मुंगेर |
177 |
(i) सदर अनुमंडल (मुंगेर शहर सहित) |
28 अक्टूबर और फिर 31 अक्टूबर से 7 नवम्बर 1946 तक, फिर कुछ ही घटनाएँ |
|
(ii) जमुई अनुमंडल |
4 से 7 नवम्बर 1946, फिर कुछ ही घटनाएँ |
|||
|
5 |
भागलपुर |
4 |
(i) सदर अनुमंडल (भागलपुर शहर सहित) |
28 अक्टूबर से 4 नवम्बर 1946 तक, फिर कुछ हीघटनाएँ |
|
(ii) बांका अनुमंडल |
31 अक्टूबर से 8 नवम्बर 1946, फिर कुछ घटनाएँ |
|||
|
(iii) मधेपुरा अनुमंडल (सहरसा उप–जिला) |
17 और 18 नवम्बर 1946, केवल दो–तीन घटनाएँ |
|||
|
6 |
संथाल परगना |
16 |
गोड्डा अनुमंडल |
31 अक्टूबर से 5 नवम्बर 1946, कुछ ही घटनाएँ |
असल में बिहार में अक्तूबर 1946 के आख़िर में भयावह मुस्लिम विरोधी क़त्ल ए आम हुआ था, कई हज़ार लोग क़त्ल किए गए थे। लाखों बेघर हुवे थे। तक़ी रहीम अपनी किताब ‘तहरीक ए आज़ादी में बिहार के मुसलमानो का हिस्सा’ में लिखते हैं कि कांग्रेसी नेताओं ने ही आग लगाया था, केबी सहाय, मुरली मनोहर प्रासाद , जगत नारएण लाल जैसे लोगों ने 25 अक्तुबर 1946 को नोआखाली डे मनाने का एलान कर दिया; और इस दिन पटना की सड़को पर “ख़ून के बदले ख़ून से लेंगे” जैसे भड़काऊ नारे लगाते हुए बहुत सारे जुलूस गांधी मैदान जमा हुए और वहां केबी सहाय की अध्यक्षता मे आम जलसा हुआ।
इसके बाद मामला बढ़ता गया, दंगे की शुरुआत 26 अक्तुबर 1946 को छपरा शहर में हुई, ख़बर सुनने के बाद डॉक्टर सैयद महमूद मुख्यमंत्री श्री कृष्णा सिंह के साथ वहां पहुंच गए, इस लिए सुरतहाल पर जल्द क़ाबु पा लिया गया। ये इलाक़ा तो शांत रहा पर मगध का इलाक़ा पुरी तरह जल उठा जिसमे पुरा पटना ज़िला, गया, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, मुंगेर बर्बादी के दहाने पर खड़ा हो गया और 28 अक्तुबर तक तो ये आग पटना से होते हवे छपरा, भागलपुर, संथाल परगना पहुंच गई।
इसमें बिहार के सर्च लाईट, इंडयन नेशन जैसे अंग्रेज़ी अख़बार और हिन्दी मे आर्यावर्त व प्रादीप जैसे अख़बार ने एैसा आग लगाया के पुरे बिहार के हिंदुओं के दिलो मे मुसलमानो के ख़िलाफ़ आग सी लग गई. यहां पर बता दुं सर्च लाईट और प्रादीप कांग्रेसी अख़बार थे और उसके इडि्टर मुरली मनोहर प्रासाद जैसे पुराने कांग्रेसी लीडर थे.
“नोआखाली और बंगाल का हत्याकांड देश के पुरुषत्व पर लांछन है.’’ कुछ ऐसा अख़बार का सार था. बता दुं के सर्च लाईट अख़बार को सैयद हसन ईमाम ने अपना ज़ाती पैसा ख़र्च कर निकाला था।
नोआखाली के क़त्लेआम का बदला तिलहाड़ा, मुबारकपुर, घोरहवां, मसौढ़ी, मसत्थू जैसे सैंकड़ों गांव से मुसलमानो का नामोनिशान मिटा लिया गया और ये वोह गांव थे जहां मुसलमान कई सौ साल से रहता आ रहा था।
क़त्ल ए आम में कोई कमी नही आई तो 3 नवम्बर 1946 को जवाहरलाल नेहरु, नवाब लयाक़त अली, सरदार अब्दुर रब नशतर सहीत कई बड़े नेता पटना पहुंच गए; पर फ़साद मे कोई कमी नही आई; तब राजेंद्र बाबू ने देखा की उन लोगों से कुछ नही हो पाएगा तो 5 नवम्बर को एक प्रेस कॉनफ़्रेंस कर के ये एलान किया के गांधी जी ने फ़ैसला किया है कि अगर बिहार मे फ़साद 24 घंटे मे नही रुका तो वो “मर्न बर्त” शुरु कर देंगे।
जहां दंगे के बाद शांति प्रयास के लिए बिहार आए महात्मा गांधी ठहरे
ज्ञात हो के इस प्रेस कानफ़्रेंस मे आचार्य कृपलानी भी मौजूद थे। जिनके बारे में तक़ी रहीम लिखते हैं कि सुचेता कृपलानी और आचार्य कृपलानी जैसे ज़िममेदार कांग्रेसी लीडरों ने नोआखाली क़त्ल ए आम के बाद कुछ एैसी मुबालग़ाआराई से काम लिया के पुरे मुल्क भर के हिन्दु मुसलमानो के ख़िलाफ़ हो गए।
इसके बाद 6 नवम्बर 1946 को गांधी जी ने बिहार को ख़िताब करते हुए एक बयान जारी किया जिसमे कहा के :- “प्रधानमंत्री (नेहरु) और उनके मंत्री की वहां मुसलसल मौजुदगी ही बिहार की कहानी बख़ूबी बयाँ कर रही है.
6 नवंबर को ही नोआखाली में गांधी ने घोषणा की के जब तक बिहार में पालगपन बंद नहीं होता, वे हर रोज़ आधे दिन का उपवास रखेंगे, तक़ी रहीम के अनुसार इस घोषणा के बाद बिहार की हिंसा में एकदम से कमी आ गई थी।
