Sunday, July 7, 2024

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पंडित मदन मोहन मालवीय और जवाहरलाल नेहरू

Shubhneet Kaushik  दिसम्बर 1961 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की जन्मशती के अवसर पर जवाहरलाल नेहरू बीएचयू में आयोजित कार्यक्रम में शरीक हुए। अपने भाषण में नेहरू ने मदन मोहन मालवीय के साथ अपने आरम्भिक जुड़ाव को याद किया। साथ ही बताया कि इंग्लैंड से वापस लौटने के बाद कैसे उन्होंने मदन मोहन मालवीय से मार्गदर्शन लिया। अपने ऊहापोह और मालवीय जी के सान्निध्य के बारे में नेहरू ने कहा : 'कोई रास्ता नहीं दिखता था किस तरह से भारत आगे बढ़े, किस तरह से हम...

बंगाल से बिहार का पृथक्करण : सच क्या झूठ क्या

  आधुनिक भारत ही की भांति आधुनिक बिहार के इतिहास पर भी अगर गौर करें तो कहना पड़ेगा कि आधुनिकता और राष्ट्रवाद की प्रगति के साथ-साथ समाज में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों में भी वृद्धि होती रही। भारत में राष्ट्रवाद, सम्प्रदायवाद तथा जातिवाद का जन्म साथ-साथ हुआ। तात्पर्य यह कि हमारा राष्ट्रवाद अपनी प्रकृति में प्रतिक्रियात्मक और नकारात्मक था। साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में जैसे ही प्रगति हुई वैसे ही उनकी प्रतिगामी शक्तियों में भी इजाफा हुआ। सन् 1885 में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने सांप्रदायिक विद्वेष एवं जातीय संगठनों...

दंगाइयों द्वारा बिहार के मदरसा अज़ीज़िया के जलाये जाने का मतलब..!

  बिहार शरीफ़ के सबसे पुराने मदरसे मदरसा अज़ीज़िया को पूरी तरह जला कर ख़ाक कर दिया जाना इस लिए भी बहुत अफ़सोसनाक है, क्यूँकि इस आग में सौ साल की एक पूरी तारीख़ जल कर ख़ाक हो गई है। क्यूँकि ये बिहार में ख़ुदा बख़्श लाइब्रेरी के इलावा इकलौता ईदारा था, जिसका पूरा स्ट्रक्चर वही था, जो इसके खुलने के वक़्त था। रेयर फ़र्नीचर, रेयर अलमीरा, और उसमे उस वक़्त की रेयर किताबें… इसके इलावा इसके पास कई नादिर नादिर मक़तूतात जो मांतिक, फ़लसफ़ा, तिब पर थीं, जिसे अपने...

My Stories

1857 की कहानी, ग़ालिब की ज़बानी 

  मिर्ज़ा ए.बी बेग 1857 के पहले स्वतंत्रता आंदोलन को सिपाही विद्रोह, ग़दर या फ़िर पहला स्वतंत्रता आंदोलन कहा जाए यह कभी न ख़त्म होने वाली बहस है. ऊर्दू भाषा के महान कवि असदुल्लाह ख़ां ग़ालिब उस समय 60 वर्ष...

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हाल के दिनो में पटना में एक एलिवेटेड रोड के लिए ऐतिहासिक ख़ुदा बख़्श लाइब्रेरी के कर्ज़न रीडिंग रूम को तोड़ने के प्रस्ताव का जमकर […]

जब ख़्वाब ने मौलवी ख़ुदाबख़्श को हज के सफ़र पर निकलने को किया मजबूर, जो था उनका आख़िरी सफ़र

पुर्व केंद्रीय मंत्री डॉ शकील अहमद अपने पिता बिहार विधानसभा के पुर्व उपसभापति शकूर अहमद के साथ कहीं जा रहे थे। उन्हें रास्ते में एक […]

गंगा जमुनी तहज़ीब के माथे का झूमर- फिराक़ गोरखपुरी

सरज़मीन-ए-हिन्द पे अक़वाम-ए-आलम के फिराक़ क़ाफ़िले आते गये हिन्दोस्तां बनता गया फिराक़ गोरखपुरी अपने इस शेर में हिंदुस्तान की हज़ारों बरस पुरानी गंगा जमुनी तहज़ीब […]

ख़्वाजा सैयद रियाज़_उद_दीन अतश : पटना से शिकागो तक बज़म_ए_ सुख़न को पहुँचाने वाले शायर

रौशनी जिसकी किसी और के काम आ जाए! एक दिया ऐसा भी रस्ते में जला कर रखना! (अतश अज़ीमाबादी) ख़्वाजा सैयद रियाज़ उद दीन अतश […]