अटल बिहारी वाजपेयी ने जब जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर मंगवाई

 

28 वर्ष की उम्र में अटल बिहारी वाजपेयी संसद पहुंचे थे. लोकसभा में कश्मीर मुद्दे को वाजपेयी ने ओजस्वी भाषण देकर उठाया. वाजपेयी का इस तरह से भाषण देना तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को काफी पसंद आया था. प्रभावित होकर संसद में ही पंडित नेहरू ने कहा कि एक दिन वाजपेयी जरूर प्रधानमंत्री बनेंगे. 1996 में ये सच साबित हुई.

किंगशुक नाग अपनी किताब ‘अटलबिहारी वाजपेयी- ए मैन फ़ॉर ऑल सीज़न’ में लिखते हैं कि एक बार नेहरू ने भारत यात्रा पर आए एक ब्रिटिश प्रधानमंत्री से वाजपेयी को मिलवाते हुए कहा था, “इनसे मिलिए. ये विपक्ष के उभरते हुए युवा नेता हैं. हमेशा मेरी आलोचना करते हैं लेकिन इनमें मैं भविष्य की बहुत संभावनाएं देखता हूँ.”

एक बार एक दूसरे विदेशी मेहमान से नेहरू ने वाजपेयी का परिचय संभावित भावी प्रधानमंत्री के रूप में भी कराया था. वाजपेयी के मन में भी नेहरू के लिए बहुत इज़्ज़त थी.

1977 में जब वाजपेयी विदेश मंत्री के रूप में अपना कार्यभार संभालने साउथ ब्लॉक के अपने दफ़्तर गए तो उन्होंने नोट किया कि दीवार पर लगा नेहरू का एक चित्र ग़ायब है. उन्होंने तुरंत अपने सचिव से पूछा कि नेहरू का चित्र कहां है, जो यहां लगा रहता था.

उनके अधिकारियों ने ये सोचकर उस चित्र को वहां से हटवा दिया था कि इसे देखकर शायद वाजपेयी ख़ुश नहीं होंगे.

वाजपेयी ने आदेश दिया कि उस चित्र को वापस लाकर उसी स्थान पर लगाया जाए जहां वह पहले लगा हुआ था.

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि जैसे ही वाजपेयी उस कुर्सी पर बैठे जिस पर कभी नेहरू बैठा करते थे, उनके मुंह से निकला, “कभी ख़्वाबों में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं इस कमरे में बैठूँगा.”

विदेश मंत्री बनने के बाद उन्होंने नेहरू के ज़माने की विदेश नीति में कोई ख़ास परिवर्तन नहीं किया.

BBC

 

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