चे ग्वेरा : विश्व का एक महान क्रांतिकारी

 

14 जून, 1928 को लातिनी अमरीकी क्रांतिकारी चे ग्वेरा का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था.

चे ग्वेरा ये वो शख़्स था जो पेशे से डॉक्टर था, 33 साल की उम्र में क्यूबा का उद्योग मंत्री बना, लेकिन फिर लातिनी अमरीका में क्रांति का संदेश पहुँचाने के लिए ये पद छोड़कर फिर जंगलों में पहुँच गया.

एक समय अमरीका का सबसे बड़ा दुश्मन, आज कई लोगों की नज़र में एक महान क्रांतिकारी है.
अमरीका की बढ़ती ताक़त को पचास और साठ के दशक में चुनौती देने वाला यह युवक – अर्नेस्तो चे ग्वेरा पैदा हुआ था अर्जेंटीना में.

वो चाहते तो अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के कॉलेज में डॉक्टर बनने के बाद आराम की ज़िंदगी बसर कर सकते थे.

लेकिन अपने आसपास ग़रीबी और शोषण देखकर युवा चे का झुकाव मार्क्सवाद की तरफ़ हो गया और बहुत जल्द ही इस विचारशील युवक को लगा कि दक्षिणी अमरीकी महाद्वीप की समस्याओं के निदान के लिए सशस्त्र आंदोलन ही एकमात्र तरीक़ा है.

1955 में यानी 27 साल की उम्र में चे की मुलाक़ात फ़िदेल कास्त्रो से हुई. जल्द ही क्रांतिकारियों ही नहीं, लोगों के बीच भी ‘चे’ एक जाना-पहचाना नाम बन गया.
क्यूबा ने फ़िदेल कास्त्रो के क़रीबी युवा क्रांतिकारी के रूप में चे को हाथों-हाथ लिया.

क्रांति में अहम भूमिका निभाने के बाद चे 31 साल की उम्र में बन गए क्यूबा के राष्ट्रीय बैंक के अध्यक्ष और उसके बाद क्यूबा के उद्योग मंत्री.

1964 में चे संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा की ओर से भाग लेने गए. चे बोले तो कई वरिष्ठ मंत्री इस 36 वर्षीय नेता को सुनने को आतुर थे.

37 साल की उम्र में क्यूबा के सबसे ताक़तवर युवा चे ग्वेरा ने क्रांति का संदेश अफ़्रीका और दक्षिणी अमरीका में फैलाने की ठानी.

कांगो में चे ने विद्रोहियों को गुरिल्ला लड़ाई की पद्धति सिखाई. फिर चे ने बोलीविया में विद्रोहियों को प्रशिक्षित करना शुरू किया.

अमरीकी खुफ़िया एजेंट चे ग्वेरा को खोजते रहे और आख़िरकार बोलीविया की सेना की मदद से चे को पकड़कर मार डाला गया.

आज अगर चे ग्वेरा ज़िंदा होते तो 90 साल के होते, लेकिन चे को जब 9 अक्तूबर, 1967 को मारा गया उनकी उम्र थी महज़ 39 साल.

(बीबीसी संवाददाता आकाश सोनी का ये लेख 9 अक्टूबर, 2007 को प्रकाशित हुआ था)

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